हमारा नज़रिया दान्दोंग पुल की कहानी एक सीधी बात दिखाती है: बड़ी शक्तियों के स्थायी मित्र नहीं होते, केवल हिसाब होता है। चीन को उत्तर कोरिया एक बफ़र के रूप में चाहिए, पर प्योंगयांग के कारण उसे अमेरिका से टकराव नहीं चाहिए। “अमेरिका के ख़िलाफ़ साझे मोर्चे” की घोषणाएं अक्सर असली तालमेल से ज़्यादा ऊंची होती हैं। वाशिंगटन ने खुद वर्षों तक वार्ता का वादा करके और उसे वापस लेकर प्योंगयांग को बीजिंग और मॉस्को की ओर धकेला। लेकिन चीन और उत्तर कोरिया के बीच दरार के कोई आंकड़े नहीं हैं, और उसकी बात करना कल्पना गढ़ना होगा। यह संपादकीय राय है, स्थापित तथ्य नहीं। प्रचलित आकलन अमेरिकी मीडिया और कुछ विश्लेषक प्योंगयांग, बीजिंग और मॉस्को की नज़दीकी को अमेरिका के ख़िलाफ़ साझा मोर्चा मानते हैं। अन्य, जिनमें एशिया टाइम्स के टिप्पणीकार भी हैं, बीजिंग की संयमित प्रतिक्रिया की ओर इशारा करते हैं: वह अपने क्षेत्रीय हितों और दूसरी शक्तियों से संबंधों का ध्यान रखता है। क्या हुआ चीन और उत्तर कोरिया नज़दीकी दिखाते हैं, पर बीजिंग सतर्क बना हुआ है। दान्दोंग में क्या हुआ, इसका आकलन कैसे हो रहा है और हम क्या सोचते हैं। 24 अक्टूबर को किम जोंग उन ने बिना पूर्व घोषणा के एक दिन के लिए चीनी शहर दान्दोंग की यात्रा की और यालू नदी पर बने नए पुल का उद्घाटन किया। यह पुल 12 साल पहले बनकर तैयार हो गया था, पर कभी इस्तेमाल नहीं हुआ। उनके साथ चीन के चौथे नंबर के अधिकारी वांग हुनिंग थे, जिन्होंने शी जिनपिंग की शुभकामनाएं पहुंचाईं। किम ने कोरियाई युद्ध में लड़े चीनी सैनिकों के स्मारक का दौरा भी किया। यह यात्रा 1950 में कोरियाई युद्ध में चीनी सैनिकों के उतरने की वर्षगांठ के आसपास हुई। बीजिंग और प्योंगयांग आर्थिक संबंध बढ़ा रहे हैं: जून में प्योंगयांग शिखर सम्मेलन में शी ने व्यापार, कृषि, निर्माण और प्रौद्योगिकी में सहयोग के विस्तार की घोषणा की थी। उत्तर कोरिया के एक पूर्व अधिकारी ने अनुमान लगाया कि यात्रा के समय के चयन पर बीजिंग के दबाव का असर हो सकता है, जिसने पुल के अधिकांश खर्च का भुगतान किया था। यह भी पढ़ें: पार्टी की बैठक और शी जिनपिंग. स्रोत CNN, 24.10.2026 The Japan Times, 25.10.2026 Radio Free Asia, 26.10.2026 CBS News / AP फ़ोटो: Wikimedia Commons, Wikimedia Commons, सार्वजनिक डोमेन (अभिलेखीय फ़ोटो). Post navigation ईरान: क़तर समझौते की कोशिश में, वार्ता पर नए हमलों का साया